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Deepak Dogra
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Top Stories

  • आलिया बनीं फैशन डिजाइनर

    00.00.0000 | युवा एवं बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री आलिया भट्ट ने एक ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल के लिए \"आलिया\" नाम से फैशन श्रृंखला डिजाइन करने के लिए अनुबंध किया है।आलिया ने कहा कि शुरूआत में उन्हें फैशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें फैशन से ज्यादा लगाव था, आलिया का फैशन संग्रह ऑनलाइन वेबसाइट जबांग पर उपलब्ध होगा।

  • मनीष मल्होत्रा के समर वेडिंग कलेक्शन की एक झलक

    09.05.2015 |  मशहूर फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा इस वक्त दुबई में हैं। उन्होंने हाल ही में वहां वोग इंडिया वेडिंग शो में हिस्सा लिया। इसमें मनीष ने अपना नया समर वेडिंग कलेक्शन पेश किया। कलर्स से लेकर लहंगा-चोली के पैटर्न में भी उन्होंने कुछ प्रयोग किया। पर्पल-गोल्ड, सालमन पिंक, वाइट-आइवरी और वाइट रेड कॉम्बिनेशन के इन लहंगों में जरी, जरदोजी के साथ फ्लोरल व रोज़ एम्ब्रॉयडरी खास रही। चोली को क्रॉप टॉप के अंदाज में पेश किया गया है।

  • फुलकारी एम्ब्रॉएडरी – कपड़ों पर खिलती फूलों की खूबसूरती

    29.05.2015 | इंडियन कल्चर में पंजाब का योगदान शानदार संगीत, लाजवाब खाने और खूबसूरत रंगों से कहीं ज़्यादा है. पटियाला सलवार सूट और फुलकारी एम्ब्रॉएडरी के बिना इंडियन फैशन बेहद नीरस होता. इस कढ़ाई का जन्म प्राचीन भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था जिसमें बेहद कुशल कारीगरी की ज़रूरत होती है. पारंपरिक कारीगरों ने खूबसूरत फूलों के मोटिफ्स से इस कला को परफेक्ट बना लिया. शुरुआती दौर में फुलकारी हर तरह के कपड़ों पर की जाती थी लेकिन बाद में ये सिर्फ स्कार्व्स और शॉल्स तक ही सीमित हो गई और कभी-कभी शूज़, बेल्ट्स और बैग्स जैसी ऐक्सेसरीज़ पर भी.फुलकारी की शुरुआत कब हुई?फुलकारी एक तरह की फूलों वाली कढ़ाई है जो कपड़ों पर की जाती है. इसको ये नाम भी फूल शब्द से ही मिला है. फुलकारी की शुरुआत 15वीं सदी में हीर-रांझा की दुखभरी प्रेम कहानी से हुई थी. ऐसा माना जाता है कि हीर के पास काफी कपड़े थे जिसमें फुलकारी गार्मेंट्स भी थे, जो उसे उसकी शादी पर तोहफे में दिए गए थे. कई लोगों का मानना है कि ये कला पर्शीया से आई है, जहां इसे गुलकारी कहा जाता है, जिसका मतलब भी लगभग यही होता है (गुल मतलब फूल और कारी मतलब काम).इसे कैसे बनाया जाता है?पारंपरिक तौर पर इसे मोटे कॉटन फैब्रिक पर बनाया जाता था जिसे खद्दर कहते हैं. आमतौर पर चार रंग के खद्दर का इस्तेमाल किया जाता था और हर रंग का अपना अलग मतलब होता था – सफेद बूढ़ी या विधवा औरतों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था, लाल छोटी लड़कियों और होने वाली दुल्हनों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था, नीले और काले रंग रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए होता था. उसके बाद पूरे खद्दर के कपड़े पर खूबसूरत फ्लोरल पैटर्न बनाए जाते थे. फुलकारी मूल रूप से दो तरह से की जाती है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में कढ़ाई पूरी होने के बाद खद्दर को सिला जाता है जिससे की लोगों को थोड़ी डिस्टॉर्टेड डिज़ाइन देखने को मिले वहीं पूर्वी पंजाब में खद्दर को कढ़ाई से पहले ही सिल लिया जाता है. कुछ फ्लोरल पैटर्न्स लोगों के क्लास को डिफाइन करते थे. जैसे की क्लस्टर स्टिच से बनाए गए फूल वर्किंग क्लासेज़ की औरतों द्वारा पहने जाते थे, वहीं डार्निंग स्टिच से बने गए फूल सोसायटी की अपर क्लास की औरतों द्वारा पहने जाते थे. फुलकारी कितने तरह की होती है?फुलकारी की खासियत इसकी वर्सटैलिटी. मूल रूप से चार तरह की फुलकारी होती है. बाघ- इस तरह की फुलकारी बहुत घनी होती है और फैब्रिक के बेस को फ्लोरल पैटर्न्स से कवर किया जाता है. थिरमा – इस तरह की फुलकारी शुद्धता का प्रतीक होती है, इसके व्हाइट बेस फैब्रिक की वजह से. ये अकसर उम्रदराज औरतों और विधवाओं द्वारा पहनी जाती है. दर्शन द्वार – इस तरह की फुलकारी गुरुद्वारों में चढ़ाई जाती है. इसमें सिर्फ फूलों के पैटर्न नहीं होते हैं बल्कि इन्सानों और जानवरों के भी पैटर्न होते हैं. बावन फुलकारी – बावन यानि की 52. इस तरह की फुलकारी में एक पीस पर 52 अलग-अलग तरह के पैटर्न बनाए जाते हैं.

  • वैस्टर्न आउटफिट पर ट्रैडिशनल ज्वैलरी ऐसे करें फिट

    04.08.2015 | परंपरागत आभूषणों को आधुनिक फैशन की पोशाकों के साथ पहन कर स्टाइलिश दिखना है तो तरीका हम आप को बताते हैं।।।भारत विविधताओं वाला देश है। यहां अलगअलग अवसरों पर अलगअलग परिधान पहनने का रिवाज है। पुराने समय में पुरुष धोतीकुरता और फेंटा जबकि महिलाएं चोली और साड़ी पहनती थीं। समय के साथ भारतवासियों का नए फैशन के प्रति आकर्षण बढऩे लगा। वे तेजी से वैस्टर्न फैशन को फौलो करने लगे। मगर उन्होंने अपने पारंपरिक फैशन को नहीं छोड़ा। फिर चाहे बात कपड़ों की हो या फिर गहनों की। इसीलिए तो पश्चिमी पोशाकों के साथ ट्रैडिशनल ज्वैलरी का भी क्रेज बढ़ रहा है। ज्वैलरी डिजाइनर श्रुति संचेती कहती हैं कि आजकल स्टेटमैंट ज्वैलरी का चलन है। इस का मतलब यह है कि अगर आप के पास परंपरागत आभूषण हैं जो आप को आप की दादी या नानी ने दिए हैं और उन का लुक काफी ऐलिगैंट है, तो उन आभूषणों को वैस्टर्न आउटफिट के साथ पहनने पर किसी भी महिला की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाएगी।आज की व्यस्त दिनचर्या में सोलह शृंगार करने के लिए किसी के पास समय नहीं होता। ऐसे में आप माथापट्टी, नथ, रानीहार, गोखरू, हथफूल आदि कई गहने हैं, जिन्हें कभी भी किसी भी अवसर पर तुरंत पहन कर सुंदर दिख सकती हैं। पोशाक और गहने ऐसे होने चाहिए जो देशविदेश कहीं भी पहने जा सकें। ब्लैक टीशर्ट, जींस के साथ माथापट्टी, गले का हार, हथफूल, गोखरू आदि में से कोई भी एक गहना पहन लेने पर सौंदर्य बढ़ जाता है। हथफूल भी 5 उंगलियों में न पहन कर केवल 1 उंगली में भी पहना जाता है। अगर आप के पास ट्रैडिशनल गहने हों तो फिर क्या कहने, क्योंकि उन जैसी कलाकारी, नक्काशी, आजकल मिलना मुमकिन नहीं। ऐसे गहने पहन कर आप भीड़ में भी अलग दिखेंगी। हैवी गहनों में चोकर नैकलैस साड़ी या सलवारकमीज के साथ सुंदर लगता है। ऐसे ट्रैडिशनल गहने बाजार में भी मिलते हैं, जिन्हें खरीद कर आप पहन सकती हैं।माथापट्टी: माथापट्टी आजकल चलन में है। सलवारकमीज, साड़ी, गाउन या फिर स्कर्ट के साथ भी आप इसे पहन सकती हैं।बालियां: मोती लगी बालियां वैस्टर्न आउटफिट के साथ ग्लैमरस दिखती हैं। ज्वैल्ड हेयर कौंब: हेयरस्टाइल को ग्लैमरस लुक देने में इस तरह के कौंब अधिक उपयोगी होते हैं। वैस्टर्न पोशाक के साथ मैस्सी बन और उस पर यह ज्वैल्ड कौंब ग्लैमर की गारंटी देता है।नैकलैस या हार: स्कर्ट, जींस, टीशर्ट, प्लाजो पैंट, फ्रौक आदि के साथ लंबी चेन या नैकपीस आप के पहनावे को आकर्षक बनाता है।इयरकफ: इस तरह के इयरपीस पूरे कानों को ढकते हैं। हालांकि ये बड़े दिखते हैं, लेकिन होते ये हलके हैं और कानों को सुरक्षित रखते हैं। वैस्टर्न आउटफिट के साथ ये ट्रैंडी लुक देते हैं।नथ: ज्वैलरी डिजाइनर मानते हैं कि नथ का प्रयोग राजामहाराजाओं के जमाने का है। इसे पहनने पर महिला अतिसुंदर दिखती है। गाउन, लौंगस्कर्ट, जींस, टीशर्ट के साथ आज इसे पहन सकती हैं। नथ आप के व्यक्तित्व को निखारती है। मोतीजडि़त नथ वैस्टर्न आउटफिट पर फबने के साथसाथ परंपरा का भी एहसास कराती है।कुसुमलाई नैकलैस: सिक्कों से बना यह नैकलैस दक्षिण भारत का मशहूर आभूषण है। इसे किसी खास अवसर या त्योहार पर पहना जाता है। किसी भी हैवी गहने के 1-2 पीस ही पहनने चाहिए ताकि ग्लैमरस लुक बना रहे।गोखरू: गोखरू गोल्डन और सिल्वर दोनों होते हैं। स्कर्ट, फ्रौक के साथ आजकल एक पांव में गोखरू पहनने का काफी रिवाज है। वैस्टर्न आउटफिट के साथ भी इसे पहना जा सकता है।ड्रैसेज के रंगों के बारे में श्रुति संचेती कहती हैं कि इस साल चटकीले रंगों का चलन है, जिन में नीला, संतरी, गुलाबी, लाल काफी पौपुलर हैं

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