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Deepak Dogra
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  • बैसाखी: लंदन में धूमधाम से मनाया बैसाखी का त्यौहार

    13.04.2015 | लंदन के साउथऑल में बैसाखी का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। बड़ी तादाद में लोगों की मौजूदगी इस बात का एहसास करा रही थी मानो पूरा लंदन ही बैसाखी के जश्न में शामिल हो गया हो। सिख समुदाय के अलावा दूर दराज के इलाकों से आये लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। खासकर युवाओं से लेकर बुजुर्ग सभी के जोश ने समाहरोह में मौजूद परिवारों के चेहरे पर खुशी बिखेर दी। सिख समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आये। इस मौके पर  युवाओं ने अपनी प्रतिभा का जमकर प्रदर्शन किया। बैसाखी का त्यौहार मनाने पहुंचे लोगों को मुफ्त खाना परोसा गया। इसमें पारंपरिक पंजाबी खाने से लेकर समोसा और आईसक्रीम का लोगों ने जमकर मजा लिया। समाहरोह में डॉ ओंकार सहोता एवं वीरेन्द्र शर्मा ने सभी लोगों को बैसाखी की हार्दिक बधाइयां दी। इस मौके पर माया टुडे के सीईओ दीपक डोगरा ने खुले दिन से सभी को बधाईयां दी और उनके बेहतर भविष्य की कामना की।   वैशाखी पर्व पंजाब की लोक संस्कृ्ति का झलकभारत देश एक कृ्षि प्रधान देश है. आज भी यहां लोग आजीविका के लिये कृ्षि पर आश्रित है. और जहां तक पंजाब की बात है, यहां कृ्षि जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी है. यहां की रीतियां, लोकगीत और जीवन शैली पूरी तरह से कृ्षि से प्रभावित है.वैशाखी पर्व क्यों मनाया जाता है?वैशाखी पर्व रबी की फसल के तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है. गेहूं , दलहन, तिलहन और गन्ने की फसल किसान को रबी की फसल के रुप में किसान को प्राप्त होती है.पंजाब में इस समय चारों और गेंहूं की फसल लहलहाती नजर आती है. फसल को देख किसानों में उंमग और उत्साह का माहौल होता है. पक्की हुई फसल का कुछ भाग अग्नि देव को अर्पित करने के बाद, इसका कुछ भाग प्रसाद स्वरुप सभी लोगों में बांट दिया जाता है. इस पर्व पर सभी लोकनृ्त्य भांगडा ओर गिद्धा करते है. साल भर की मेहनत करने के बाद धरती मां सोने से फसल देती है, उसकी कटाई के बाद सारी थकान मिटाकर आने वाला मौसम तन और मन को एक नई ऊर्जा शक्ति से भर देता है.वैशाखी पर्व मूल रुप से नई फसल की कटाई का उत्सव है. वह भी रबी की फसल की कटाई का उत्सव. पंजाब में रबी की फसल में कई अन्य खाद्वानों भी उगाये जाते है. इसमें चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी, कुसुम, अंरंडी आदि की फसल इस मौसम में पककर तैयार होती है.वैशाख मास का ऎतिहासिक महत्ववैशाख मास के पर्व न होकर, पर्वों का समूह है. सिक्खों के दूसरे गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म इसी माह में हुआ था. पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृ्ष्टि की रचना इसी दिन की थी. महाराजा विक्रमादित्य के द्वारा श्री विक्रमी संवत का शुभारंभ इसी दिन से हुआ था. भगवान श्री राम का राज्यभिषेक इसी दिन हुआ था.नवरात्रों का प्रारम्भ, सिंध प्रातं के समाज संत झूलेलाल का जन्म दिवस, महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना, धर्मराज युधिष्ठर का राजतिलक, महावीर जयंती आदि कई महत्वपूर्ण घटनाएं इस माह से जुडी हुई है.

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