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Deepak Dogra
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  • मच्छरों को पकड़ने वाले रसायन की खोज

    00.00.0000 | मलेरिया की रोकथाम की दिशा में शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने इस बात की खोज की है कि मलेरिया फैलाने वाली गर्भवती मादा एनोफ्लिज मच्छर एक रसायन सेडरॉल से निकलने वाली गंध ओर आकर्षित होती हैं। यह खोज मच्छरों को आकर्षित कर उनका खात्मा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के परियोजना प्रमुख अलरिक फिलिंगर ने कहा, "हमारे अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि गर्भवती एनोफ्लिज गैंबी मच्छर सेडरॉल से निकलने वाली गंध की ओर आकर्षित होती हैं।"शोधकर्ताओं ने एनोफ्लिज मच्छर के जीवन चक्र का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि सामान्य पानी की तुलना में सेडरॉल युक्त पानी में एनोफ्लिज गैंबी मच्छर दोगुनी संख्या में अंडे देने पहुंचती हैं। इस बात से उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सेडरॉल की गंध से वह आकर्षित होती हैं और इसी कारण से वह सेडरॉल युक्त पानी में ज्यादा से ज्यादा संख्या में अंडे देने पहुंचती हैं।यह शोध पत्रिका 'मलेरिया' में प्रकाशित हुआ है।

  • महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है दवाओं का साइड इफेक्ट्स

    22.04.2015 | लंदन| दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति महिलाएं पुरुषों से अधिक संवेदनशील क्यों होती हैं, इसका जवाब वैज्ञानिकों को मिल गया है। इसका कारण कोशिकाओं की संवेदनशीलता होती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। महिलाएं खासकर जो रजोनिवृत्त हो चुकी हैं, की यकृत की कोशिकाएं दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति पुरुषों से ज्यादा संवेदनशील होती हैं।अध्ययन के मुताबिक, यह पहले से ही ज्ञात है कि यकृत को नुकसान पहुंचाने वाली दवाएं पुरुषों से अधिक महिलाओं को प्रभावित करती हैं, लेकिन पहली बार यह बात सामने आई है कि यह प्रभाव कोशिकीय स्तर पर होता है।अध्ययन में कहा गया है, "हमारे निष्कर्ष में यह बात सामने आई है कि महिलाओं की कोशिकाएं कुछ दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।"अध्ययन के लिए यूरोपियन कमीशन ज्वाइंट रिसर्च सेंटर ने महिला व पुरुषों के शरीर से लिए गए यकृत कोशिकाओं पर पांच दवाओं (डाइक्लोफेनेक, क्लोरप्रोमाजीन, एसीटामिनोफेन, वेरापामिल तथा ओमेप्राजोल) का अध्ययन किया। इन दवाओं का यकृत पर दुष्प्रभाव पहले से ही ज्ञात है। अध्ययन के दौरान महिलाओं (रजोनिवृत्त) के यकृत की कोशिकाएं ज्यादा संवेदनशील पाई गईं। यह अध्ययन पत्रिका 'पीएलओएस ओएनई' में प्रकाशित हुआ है।

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