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Deepak Dogra
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  • सबको होता है पीठ का दर्द, लेकिन बेवजह नहीं

    16.03.2015 | ज्यादातर चिकित्सा विशेषज्ञों की यही राय है कि इस बीमारी के प्रति जागरूक रहना ही इसका सबसे अच्छा इलाज है। 75 से 80 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीडि़त होते है लेकिन इसे साधारण समझकर इलाज के लिए किसी चिकित्सक का सहारा न लेकर स्वयं ही इसका इलाज करते रहते हैं और जब वे पूरी तरह से इस रोग की गिरफ्त में आ जाते हैं। तब भागदौड़ शुरू करते हैं।वास्तव में शरीर के इस दर्द की वजह रीढ़ की हड्डी व उससे जुड़ी मांसपेशियां हैं जिनमें गलत ढंग से बैठने, खड़े होने ओर लेटने के समय आवश्यकता से अधिक दबाव पड़ने से दर्द होने लगता है। प्रायः बच्चे पेट के बल लेट कर पढ़ाई करते हैं या टीवी देखते हैं। जब वह स्कूल में बैंच पर बैठकर काम करते हैं तो गर्दन सिर व कमर को आगे की तरफ झुका लेते हैं। इस मुद्रा में बैठकर काम करने से पीठ दर्द की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। सच तो यह है कि हम अपनी दिनचर्या के दौरान कमर का बहुत ज्यादा दुरूपयोग करते हैं। हम में से ज्यादातर लोग, विशेषकर घरेलू औरतें कोई भी व्यायाम नहीं करतीं। अक्सर घंटों तक बिस्तर पर पड़े रहना या गलत मुद्रा में बैठना, उठना और सोना कमर दर्द का कारण बनता है।पीठ दर्द के कारणों का पता लगाने के लिए हमें पीठ की रचना के बारे में जानना होगा। रीढ़ की हड्डी 33 हड्डियों को एक के ऊपर एक रख कर मिलने से बनी है। प्रत्येक हड्डी के बीच में एक डिस्क होती है। शरीर के ऊपरी हिस्से का सारा वजन रीढ़ की हड्डी को ही सहन करन पड़ता है जिस के कारण पीठ दर्द की परेशानी हो जाती है।भले ही आप कितने भी मजबूत क्यों न हों, यदि आप जरूरत से अधिक मेहनत करेंगे तो आप की पीठ इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगी। थके होने पर भी लगातार काम करते रहना पीठ दर्द को बुलावा देना है। गलत तरीके से व्यायाम करना भी पीठ दर्द का एक कारण बन सकता है। उम्र बढ़ने के साथ−साथ शरीर का भी क्षय होने लगता है और रीढ़ की हड्डी को होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि युवावस्था में रीढ़ पर कितना दबाव पड़ा है।आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद रीढ़ की हड्डियों का क्षरण शुरू हो जाता है। हड्डियों में कैल्शियम और अन्य खनिज पदार्थों की कमी से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। रीढ़ की हड्डी चोट, दबाव व किसी भी प्रकार के विकार के कारण तनावग्रस्त होती है तो उसमें तकलीफ होती है। जो लोग स्लिप डिस्क (स्लिप डिस्क कोई भारी चीज उठाने, खेल या किसी क्रिया के दौरान शरीर के गलत ढंग से खिंचने या किसी प्रकार के अचानक दबाव के कारण होता है) के शिकार होते हैं उन्हें पीठ दर्द होना आम बात है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी, लंबी बीमारी आदि कुछ कारणों से भी पीठ का दर्द होता है।शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण रक्त संचालन की प्रक्रिया में गड़बड़ होने से रीढ़ की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है जिस से पीठ दर्द होता है। अधिक भागदौड़ व परिश्रम करने वाले लोग जो काम से साथ−साथ आराम नहीं करते वे भी पीठ दर्द से पीडि़त रहते हैं।ज्यादा मोटे लोग भी प्रायः पीठ के दर्द से परेशान रहते हैं। ऐसे लोग जो अक्सर नरम बिस्तर पर लेटते रहते हैं, पीठ दर्द की चपेट में आ जाते हैं, क्योंकि बिस्तर पर लेटने के कारण मांसपेशियां आराम करने लगती हैं और हड्डियों को सहारा न मिलने के कारण पीठ में दर्द होने लगता है।ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल भी पीठ दर्द का एक कारण हो सकते हैं। ऊंची एड़ी की वजह से ज्यादा तेज चलने पर संतुलन बिगड़ने से पैर मुड़ जाता है और इसका सीधा असर रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है और पीठ का दर्द शुरू हो जाता है। आहार के नियमों के विपरीत भोजन करने वाले लोगों को भी अक्सर पीठ दर्द की शिकायत रहती है। अपने उठने, बैठने, झुकने, लेटने, चलने आदि की गलत मुद्राओं में सुधार ला कर हम पीठ दर्द की रोकथाम कर सकते हैं।ऊंची एड़ी के चप्पल व सैंडिल ज्यादा समय तक न पहनें इससे मांसपेशियों पर आवश्यकता से अधिक दबाव पड़ता है। गलत मुद्रा में बैठना हमारी पीठ के लिए सब से खराब स्थिति है। अतः हमेशा आरामदेह स्थिति में बैठना चाहिए। और इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि बैठते समय इस में कोई झुकाव न हो। हमेशा कुर्सी की पीठ से अपनी पीठ सटाकर ही बैठना चाहिए। कुछ भी लिखते पढ़ते समय हमारी गर्दन और सिर आगे ओर झुके होने चाहिए। कुर्सी में कभी भी अपने शरीर को तोड़ मरोड़ कर नहीं बैठना चाहिए।जमीन से कोई भी वस्तु उठाते समय अपनी पीठ को न झुकाकर हमेशा घुटनों की मोड़कर ही वस्तु को उठाना चाहिए। ऊंचाई पर रखी किसी वस्तु को उतारने के लिए उचकने की जगह स्टूल आदि का उपयोग करना चाहिए। हमेशा सीधे बैठकर ही भोजन करना चाहिए न कि कमर को आगे की ओर झुकाकर।कभी लगातार खड़े रहना हो तो हमेशा पांव की स्थित बिदलकर ही खड़े रहना चाहिए। हमेशा मुलायम व आरामदेह जूते, चप्पल व सैंडिल पहनने चाहिए। रात में गहरी नींद में सोना चाहिए। गहरी नींद में सोने से मांस पेशियों को बल मिलता है और खून में हारमोन की मात्रा बढ़ती है। रात को सोते समय बीच−बीच में करवट बदलते रहना चाहिए। ज्यादा ऊंचे तकिए का उपयोग नहीं करना चाहिए।कमर के नीचे मांसपेशियों में सक्रियता लाने वाले कुछ व्यायाम भी अपनी दिनचर्या में शामिल करने चाहिए। इससे मांसपेशियों में लचीलापन बना रहता है, वह मजबूत होती हैं जिससे पीठ दर्द हमें आसानी से अपनी गिरफ्त में नहीं ले सकेगा। हम निम्न प्रकार के व्यायाम अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।सीधे खड़े होकर दोनों हाथ सीधे ऊपर उठाएं। सांस लें और बाई ओर झुकें। कुछ सेकंड सांस रोक कर इसी दशा में रहें, फिर धीरे−धीरे फिर से पहले वाली स्थिति में आ जाएं व सांस छोड़े। इस तरह सांस खीचंते हुए दाई ओर भी यही क्रिया दोहराएं। आरंभ में कम से कम 5−5 बार इस क्रिया को दोहराएं, फिर धीरे−धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते जाएं।हर रोज पंजों को ऊपर उठाते हुए लंबी सांस लें व फिर नीचे लाते हुए सांस छोड़े, ऐसा 15−20 बार करें। फर्श पर बैठकर पैर आगे की तरफ सीधे फैलाएं व दोनों हाथ गर्दन के पीछे रखें और धीरे−धीरे घुटनों पर सिर टिकाएं। प्रयास करते रहें। कुछ दिनों बाद पीठ दर्द में बहुत आराम मिलेगा। जब एक बार व्यायाम करें तो यह नियम बीच में न छोड़ें।कुछ दूसरी बीमारियों, जैसे गुर्दे की बीमारी, टीबी, आदि में भी पीठ के दर्द की शिकायत रहती है जिसे व्यायाम या मालिश से ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे में अपने चिकित्सक की राय जरूर लेनी चाहिए। कुछ दिनों तक फिजियोथेरेपी से भी इस रोग से छुटकारा मिल सकता है।

  • हिमाचल में स्वाइन फ्लू से 20 की जान गई

    00.00.0000 | हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू से 20 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीमारी से सबसे अधिक सात लोगों की मौत शिमला में हुई। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने मंगलवार को विधानसभा को बताया, "स्वाइन फ्लू के कारण राज्य में 20 लोगों की मौत हुई है, जिनमें सबसे ज्यादा सात मौत शिमला जिले में हुए।"उन्होंने कहा कि सोमवार की रात शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आईजीएमसीएच) में स्वाइन फ्लू से पीड़ित दो लोगों ने दम तोड़ दिया।उन्होंने कहा कि 13 लोगों ने आईजीएमसीएच में दम तोड़ दिया, जबकि कांगड़ा जिले के टांडा स्थित राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में सात लोगों की मौत हुई।कौल सिंह ने कहा कि राज्य में स्वाइन फ्लू के 302 संदिग्ध नमूने इकट्ठे किए गए थे, जिनमें से 79 की जांच के नतीजे सकारात्मक आए।उन्होंने कहा, "50 लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए, जिनका इलाज किया गया है।"उन्होंने कहा कि राज्य में स्वाइन फ्लू अब काबू में है।

  • डीजल वाहन अधिक हानिकारक

    00.00.0000 | अनुसंधानकर्ताओं ने डीजल इंजन से होने वाले प्रदूषण के कारण हमारे फेफड़ों को होने वाले नुकसान पर एक नया अध्ययन किया है। इस अध्ययन में डीजल इंजन से होने वाले प्रदूषण और श्वांस संबंधी बीमारियों के बीच संबंधों की पहचान की गई।लंदन के इंपीरियल कॉलेज के अनुसंधानकर्ता रायन रॉबिंसन ने कहा, "हमारे शोध के अनुसार जीवाश्म ईंधन, खासकर डीजल पर हमारी निर्भरता हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। हमें वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान देना चाहिए।"नगरीय क्षेत्र में होने वाले वायु प्रदूषण में डीजल इंजन से होने वाले प्रदूषण प्रमुख हैं, जिसमें गैसों के जटिल यौगिक मिले रहते हैं।रॉबिंसन ने कहा, "अध्ययन में खुलासा हुआ है कि डीजल इंजन से होने वाले प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है। चूंकि डीजल इंजन से निकलने वाली हानिकारक गैसों के कण बेहद सूक्ष्म होते हैं, जो न सिर्फ आंखों से दिखाई नहीं देते, बल्कि हमारे फेफड़ों में बहुत अंदर तक चले जाते हैं।"गौरतलब है कि हमारे फेफड़ों में संवेदी नसें होती हैं, जो संभावित हानिकारक तत्वों की पहचान कर लेती हैं और शरीर को उनके प्रति सचेत कर देती हैं, जैसे खांसी का आना।रॉबिंसन ने कहा, "हमने गौर किया कि डीजल इंजन से निकलने वाली गैसों के कंणों से जैविक विधि से निष्कर्षित किए गए रसायन फेफड़े की इन संवेदी नसों को संवेदनशील कर देती हैं।"रॉबिंसन ने अपना यह अध्ययन 13वें यूरोपीय रेस्पिरेटरी सोसाइटी लंग साइंस कान्फ्रेंस में प्रस्तुत किया।

  • आईटीईसी साझेदारी कार्यक्रम होगा डिजिटल

    00.00.0000 | सरकार का एक प्रमुख कूटनीतिक कार्यक्रम भारतीय प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) साझेदारी कार्यक्रम अपना डायनेमिक डिजिटल मंच शुरू करने जा रहा है, जिससे इसे और विस्तार मिलेगा और इसका उपयोग आसान हो जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए भारत 160 देशों से जुड़ा हुआ है और इसके जरिए सरकार अपने विकास के अनुभवों को साझा करती है। कार्यक्रम की शुरुआत 1964 में हुई थी।अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह एक लोकप्रिय कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत विभिन्न देशों के 100 अधिकारियों के प्रशिक्षण के साथ की गई थी। अब तक इसके तहत 10 हजार से अधिक छात्रवृत्ति वितरित किया जा चुका है। विकासशील देशों में इसकी मांग बढ़ती जा रही है।आईटीईसी का पर्यवेक्षण करने वाले विदेश मंत्रालय के विकास साझेदारी-2 विंग के संयुक्त सचिव कुमार तुहिन ने आईएएनएस से कहा, "इस साल हम आईटीईसी की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। हम एक नया डायनेमिक आईटीईसी पोर्टल शुरू करने जा रहे हैं। एक नवीनीकृत पोर्टल, जो सभी सदस्य देशों, पूर्व छात्रों, भारतीय दूतावासों को जोड़ कर रखेगा।"उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल भारत पहल के अनुरूप है।तुहिन ने कहा, "आईटीईसी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने का नया तरीका भारतीय दूतावासों के लिए कम जटिल होगा। आवेदनकर्ता भी एक ईमेल लॉगइन के जरिए अपने आवदेन की स्थिति देख पाएंगे"लोग इसी पोर्टल के जरिए अपने विचार और टिप्पणी भी दे पाएंगे।हर वर्ष 15 सितंबर को आईटीईसी दिवस मनाया जाता है। इस दौरान साझेदार देशों में भारतीय दूतावास प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों और पूर्व छात्र रह चुके अधिकारियों को आमंत्रित करते हैं, जहां वे अपने अनुभव साझा करते हैं।आईटीईसी कार्यक्रम दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), अंग्रेजी भाषा, दूरसंचार और कृषि शोध से संबंधित 280 पाठ्यक्रम देश में 40 चुने हुए संस्थानों के जरिए चलाता है।उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत इन दिनों साझेदार देशों में फॉरेंसिक साइंस और साइबर क्राइम जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की मांग काफी बढ़ रही है, लेकिन सर्वाधिक मांग आईटी की है।तुहिन ने कहा, "आईटीईसी के जरिए विकास साझेदारी निरंतर और स्थायी प्रक्रिया है और इसकी अधिक चर्चा नहीं होती है। लेकिन इससे भारत के प्रति काफी सद्भाव पैदा होता है और हमेशा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है।"एशियाई, पूर्वी यूरोपीय, मध्य एशियाई, अफ्रीकी और लातिन अमेरिकी देशों में आईटीईसी विकास साझेदारी ने साझेदार देशों में भारत की शाख प्रौद्योगिकी के जानकार, विशेषज्ञ और प्रशिक्षक के रूप में बनी और मजबूत हुई है।इस कार्यक्रम की लोकप्रियता का पता इसी तथ्य से लगता है कि सेशेल्स में, जहां की प्रधानमंत्री मोदी ने गत सप्ताह यात्रा की थी, 1,000 लोगों ने आईटीईसी के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है, जबकि द्वीपीय देश की जनसंख्या सिर्फ 90 हजार है।

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