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Deepak Dogra
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  • छत्तीसगढ़ के 50 हजार विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप और टैबलेट : रमन सिंह

    00.00.0000 | छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सूचना क्रांति योजना के तहत राज्य में इस वर्ष विभिन्न कॉलेजों के 50 हजार विद्यार्थियों को नि:शुल्क लैपटॉप और कम्प्यूटर टैबलेट दिए जाएंगे। डॉ. सिंह ने रविवार को जिला मुख्यालय राजनांदगांव में आयोजित कार्यक्रम में जिले के 18 कॉलेजों के अंतिम वर्ष के तीन हजार 033 छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क कम्प्यूटर टैबलेट की सौगात देकर यह घोषणा की। समारोह में छत्तीसगढ़ सूचना क्रान्ति योजना के तहत जिले के 15 सरकारी कॉलेजों और तीन निजी कॉलेजों के स्नातक और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण किया गया। टैबलेट पाने वालों में एक हजार 434 छात्र और एक हजार 599 छात्राएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना के तहत इस वर्ष प्रदेश के 50 हजार विद्यार्थियों को लैपटॉप और कम्प्यूटर टैबलेट देने का निर्णय लिया है। इसकी शुरूआत राजनांदगांव से हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारी यह योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल भारत के सपने को भी साकार करेगी। सूचना क्रांति के इस युग में दुनिया के देशों के बीच की दूरियां लगभग खत्म हो गई है और पूरा विश्व ग्लोबल गांव का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी भी हमेशा आगे रहें, इसके लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सूचना क्रांति योजना की शुरूआत की है और इस योजना के तहत नि:शुल्क लैपटाप और कम्प्यूटर टैबलेट वितरित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ लोकसभा सांसद अभिषेक सिंह ने भी विद्यार्थियों को कम्प्यूटर टेबलेट का वितरण किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कम्प्यूटर टेबलेट के रूप में अब ऐसा एक यंत्र आपके हाथ में है जिससे आप अपनी पढ़ाई लिखाई की जानकारी को स्टोर करते हुए एक-दूसरे से शेयर भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत से छात्र-छात्राओं की पारिवारिक आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे कम्प्यूूटर की पढ़ाई के लिए टैबलेट खरीद सकें। छत्तीसगढ़ के युवाओं की इस जरूरत को पूरा करने छत्तीसगढ़ युवा सूचना क्रांति योजना के तहत राज्य शासन द्वारा टैबलेट वितरण किया जा रहा है। 

  • जिंदगी का पाठ सिखाएंगी किताबें

    18.04.2015 | बच्चों के स्कूल व घर में स्थितियां कुछ ऐसी हो चली हैं कि पाठयक्रम के अलावा उन्हें किताबें पढऩे का मौका ही नहीं मिलता। दरअसल बच्चे के व्यक्तित्व में संपूर्णता लाने के लिए जरूरी है कि वह जीवन की वास्तविक जानकारी भी हािसल करे। इसके लिए जरूरी है वह किताबें भी पढ़े। उनसे जीवन में यथार्थ के अनुभव हासिल करे। कैसे जगाएं बच्चों में किताबें पढऩे का शौक, बता रही हैं हम...वीडियो गेम्स, कार्टून शोज और एक्टिविटीज क्लासेस, इससे ज्यादा का समय आज के बच्चों के पास नहीं है। स्कूल से थक कर आने के बाद उनके पास सोने का समय मुश्किल से ही होता है। ऐसे में यदि हम उन्हें किताबें पढऩे के लिए कहें तो भला कैसे! सच तो यह है कि आज की भागती जिंदगी में न तो हमारे पास किताबें पढऩे का समय है और न ही बच्चों के पास। जब हम स्वयं ही किताबें लेकर नहीं बैठते हैं तो भला बच्चे कैसे पढ़ेंगे! जबकि सच तो यह है कि किताबें पढऩे का अलग ही मजा और लुत्फ है, साथ ही इससे बच्चों की रीडिंग हैबिट भी अच्छी होती है। जिंदगी के पाठ सीखने को मिलते हैं सो अलग।कई तरह की किताबें : जानवरों की कहानियां, एडवेंचर, रहस्य, लोककथा, परियों की कथा और न जाने कितनी तरह की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं। बच्चे की उम्र के अनुसार उसे पढऩे के लिए किताबें दें तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है। रीडिंग लेवल का अर्थ है कि बच्चा स्वयं से किताब पढ़ ले और कंटेंट को समझ भी ले। बेहतर तो यह होगा कि आप स्वयं ही अपने लाड़ले से पूछें कि उसे किस तरह की किताबें पढऩे का मन करता है। एक बार उसने अपनी रुचि बता दी तो आप उसके लिए किताबें आसानी से चुन सकेंगे। यह भी हो सकता है कि आप उसे साथ लेकर किताबों की दुकान में जाएं और उसे स्वयं ही किताबें चुनने का मौका दें।किताब के बारे में करें बात : आपके बच्चे ने हाल में जो भी किताब पढ़ी है, उसके बारे में उससे बात करें, इससे उसकी किताबें पढऩे में रुचि और बढ़ेगी। आपका बच्चा यह सोचकर किताब पढ़ेगा कि कोई है जो उस किताब के बारे में उसकी राय जानना चाहता है। कई बार किताब पढक़र बच्चे के मन में विचारों का जो समुद्र उफान लेगा, उसे जानकर आपको आश्चर्य होगा। उसकी जानकारी का दायरा, पढऩे और लिखने की कला का विस्तार होगा।उसकी रुचि जरूरी: इसके बाद का कदम तनिक मुश्किल जरूर है लेकिन बतौर अभिभावक आपको इसके लिए मेहनत करनी होगी। आपको यह याद रखना है कि आप अपनी रुचि अपने बच्चे पर थोंपे नहीं। आपको फलां लेखक अच्छा नहीं लगता होगा लेकिन संभव है कि उसे उसी लेखक की लिखी किताबें पढऩा पसंद हो। यदि ऐसा है तो आपको बच्चे की पसंद के साथ ही चलना चाहिए। यही बड़ी बात है कि उसकी रुचि उक्त किताब में है और वह उसे पढऩा चाहता है। समय के साथ वह अन्य लेखकों और उनकी किताबों को पढऩे में भी रुचि दिखाएगा।पारिवारिक गतिविधि: किताबें पढऩे को पारिवारिक गतिविधि के तौर पर विकसित कीजिए। अपने बच्चे को दिखाइए कि लोग किताबें पढ़ते हैं और उनकी इसमें रुचि है। आप खुद ही उसके सामने उदाहरण बनिए, अखबार, पत्रिका, बायोग्राफी, फिक्शन, नन-फिक्शन कुछ भी पढि़ए। अपने घर में किताबों को जगह दीजिए, ऐसी जगह जहां से उसे ढेर सारी किताबें दिखाई दें। किताबों को अपने बच्चे के जीवन का अभिन्न अंग बनाइए। जन्मदिन पर उसे अन्य उपहारों के साथ किताबें भी दीजिए। साथ ही उसके जन्मदिन पर अन्य बच्चों को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर किताबें दीजिए। गर्मी की छुट्टियों में कुछ किताबें खरीद कर ले आइए। लाइब्रेरी जाइए, बुक स्टोर जाइए ताकि किताबों के प्रति उसकी रुचि बढ़े।

  • सोच-समझ कर बदलें करियर

    06.05.2015 | कुछ लोगों को मौजूदा करियर की टाइमिंग पसंद नहीं आती तो कुछ को उस क्षेत्र की जिम्मेदारियां उबाऊ लगती हैं। वहीं कुछ को लगता है कि अपनी योग्यता व क्षमता के हिसाब से योजना न बनाने के चलते वे गलत करियर में आ गए हैं। यानी युवा कई कारणों से करियर में बदलाव चाहते हैं। लेकिन नए क्षेत्र में कदम बढ़ाना पूरी तरह से नई सोच के साथ काम करने जैसा होता है। करियर बदलने के रास्ते और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बता रही हैं हम...कई साल एक ही क्षेत्र में नौकरी करने के बावजूद किसी न किसी मोड़ पर ज्यादातर लोगों को यह महसूस होने लगता है कि करियर का उनका चुनाव गलत था। इस बात का एहसास होते ही उस क्षेत्र से निकलने की उनकी बेचैनी बढ़ जाती है। वरिष्ठ करियर काउंसलर डॉ. संजीब कुमार आचार्य ने बताया कि लोगों को ऐसा तब ज्यादा महसूस होता है, जब वह किसी काम में असफल होने लगते हैं। जब तक किसी क्षेत्र या करियर में उन्हें सफलता हासिल हो रही होती है, उन्हें अपने गलत करियर में आने का एहसास नहीं होता। ऐसे लोगों को करियर बदलने से पहले तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहला - अपनी रुचि, दूसरा - अपना व्यक्तित्व और तीसरा - अपनी योग्यता। योग्यता, जानकारी और कौशल के अभाव में सिर्फ रुचि और व्यक्तित्व के आधार पर करियर का चुनाव नहीं किया जा सकता। वह फैसला हमेशा गलत होगा। यदि आप वर्तमान करियर को बदल कर अपनी रुचि वाले क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहते हैं तो भी उस क्षेत्र का ज्ञान, कौशल और समझ जरूरी है। हुनर और जानकारी के अभाव में आप कहीं भी सफल नहीं हो सकते और असफलता आपको हर पल अपने गलत फैसले का एहसास कराती रहेगी। इसलिए करियर बदलने से पहले उससे जुड़ी इन बातों को समझ लें: वर्तमान कंपनी में ही परख लें अपनी क्षमताकरियर में परिवर्तन करने से पहले यह जरूरी है कि कहीं और काम तलाशने से पहले वर्तमान संस्थान में ही कोई मिलता-जुलता मौका तलाशें। कई ऑफिस में काम के रोटेशन को बढ़ावा दिया जाता है यानी कुछ दिनों तक एक विभाग में रहने के बाद यदि कर्मचारी चाहे तो उसकी रुचि के हिसाब से दूसरा विभाग सौंप दिया जाता है। इससे आपको किसी दूसरे संस्थान में जाए बगैर ही अपनी क्षमताओं को परखने का मौका मिल जाएगा।पहले कर लें तैयारीकिसी भी नये काम में उतरने से पहले अपनी शैक्षणिक योग्यता, अपने हुनर और रुचियों आदि का हिसाब लगाएं। अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करें। जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उस क्षेत्र की कंपनियों के बारे में भी जानकारी एकत्रित करें। उनकी वेबसाइट देखें। नई खबरों से अपडेट रहें। वर्कशॉप और सेमिनार में भाग लें। उस क्षेत्र में पहले से काम कर रहे लोगों से वास्तविक स्थिति को जानें और उसके हिसाब से खुद को ढालें। किसी नए क्षेत्र में कदम रखने से पहले उसकी तैयारी जरूरी है।भटकाव से घबराएं नहींआप क्या करना चाहते हैं, क्या नहीं? यह पशोपेश सिर्फ आपके साथ नहीं, अधिकांश लोगों के साथ होता है। ज्यादातर लोग जीवन की पहली नौकरी बिना लक्ष्यों को जानते हुए करते हैं। उनमें से कुछ उसी काम को जीवनभर करते रहते हैं और कुछ स्विच कर जाते हैं। पहले करियर बदलने वाले लोगों की संख्या सीमित होती थी, पर आज के दौर में दो-तीन साल की नौकरी करने के बाद ही युवा करियर बदलने को बेचैन होने लगते हैं।नौकरी बदल कर देखेंकई बार लोग काम से बोरियत होने या बॉस व सहकर्मियों के स्वभाव के कारण भी करियर बदलने का फैसला कर लेते हैं। यदि ऐसा है तो आप कुछ दिनों का ब्रेक ले सकते हैं या नौकरी बदल सकते हैं। नौकरी में बदलाव से ही आपकी जरूरत पूरी हो रही है तो करियर में बदलाव के बड़े फैसले पर न टिके रहें, क्योंकि ऐसा दूसरी जगह नहीं होगा, इस बात की गारंटी नहीं है। ऐसे में नया करियर अपनाने की जगह अपने ही क्षेत्र की दूसरी कंपनी में नौकरी तलाशना अधिक बेहतर होगा।जान लें सभी पहलुओं को कई बार हम जल्दबाजी में फैसला कर बैठते हैं। योजना बनाते हुए हमें सब कुछ अच्छा ही दिखता है। लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं यानी हर क्षेत्र में खूबियों के साथ कुछ खामियां भी होती हैं। किसी सेक्टर में पांव रखने से पहले उसके सभी पहलुओं को जान लें।तरक्की भी है जरूरीउद्देश्य और लक्ष्य के बगैर कोई भी जोखिम उठाना शुरू से ही मुसीबत का सबब होता है, इसलिए यदि करियर स्विच करने का विचार बना रहे हैं तो पहले दीर्घकालिक रणनीति जरूर बनाएं। यह देख और समझ लें कि उस क्षेत्र में तरक्की की कितनी संभावना है। उस क्षेत्र के किसी करीबी दोस्त से राय लें और तभी फैसला करें।अवसर पर नजरकरियर स्विच करने के लिए मौका मिलना भी एक अहम बात है। इसलिए अवसरों को पहचानें और अखबारों व पत्रिकाओं पर नजर रखें, जहां नई नौकरियों की जानकारी दी जाती है।रेज्यूमे में बदलावरेज्यूमे हमारा प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए उसका प्रभावी होना बेहद जरूरी है। लेकिन रेज्यूमे में किया गया बदलाव संबंधित क्षेत्र के शोध पर आधारित होना चाहिए। वहां के ऑफर व पैकेज की जानकारी लें। इसके बाद अपने रेज्यूमे में अपने कौशल और अनुभव से जुड़े तथ्य जोड़ें। ध्यान रखें कि अपने रेज्यूमे में कभी गलत जानकारी ना दें। आजकल अमूमन हर कंपनी बैक ग्राउंड चैकिंग करवाती है और अगर आपके द्वारा दी गई जानकारी गलत निकली, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं।कहीं आप गलत करियर में तो नहीं !सोचिये अगर सचिन तेंदुलकर गाना गा रहे होते और लता मंगेशकर क्रिकेट खेलतीं तो क्या होता! जाहिर है अपने क्षेत्र में गगनचुंबी कामयाबी देखने वाली और सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली ये दोनों हस्तियां आज इस मुकाम पर न होतीं। यानी हमारे जीवन में सही करियर का चुनाव बेहद मायने रखता है। लेकिन यह कैसे मालूम होगा कि आप सही करियर में हैं या नहीं। नीचे बताए गए लक्षणों के जरिये आप समझ पाएंगे कि आपने अपने लिए विकास का गलत रास्ता चुना है या सही-नौकरी की खामियां निकालनाकाम कोई भी हो, उसे करने के दौरान या उसके बाद खुशी महसूस न होना, हमेशा उसमें कमियां नजर आना और दोस्तों के बीच उस काम की बुराइयां गिनाते रहना नौकरी के प्रति आपकी उदासीनता को दर्शाता है। इन सभी लक्षणों से यह स्पष्ट होता है कि आपकी नौकरी आपको खुशी नहीं दे रही।नहीं होते गौरवान्वितजब कोई आपके काम के बारे में पूछता है, आप मुद्दा बदल देते हैं या कहते हैं कि कुछ खास नहीं है बताने को। गलत करियर में फंसने का यह दूसरा लक्षण है।खराब प्रदर्शनजब किसी काम में आप अच्छे और कुशाग्र होते हैं तो उसे करना अच्छा लगता है, लेकिन लगातार गिरता प्रदर्शन इस बात का संकेत देता है कि आप उस काम में ठीक नहीं हैं। यदि आपके साथ ऐसा है तो दूसरे क्षेत्र के बारे में सोचने का यह सही समय है।हर दिन चुनौतीपूर्णजिस तरह हर गेंद पर छक्का नहीं मारा जा सकता, उसी तरह ऑफिस का हर दिन एक समान नहीं होता। किसी दिन आप बेहतर प्रदर्शन करते हैं और कोई दिन चुनौती भरा होता है। लेकिन यदि आपका हर दिन चुनौतीपूर्ण होता है और दिन काटना मुश्किल हो जाता है तो निश्चित तौर पर आप गलत जगह काम कर रहे हैं।   सिर्फ पैसे के लिए नौकरीहम में से कुछ लोग अपने सपनों की बजाय ज्यादा वेतन वाली नौकरी को प्राथमिकता देते हैं। यदि आप सिर्फ पैसों के लिए कोई नौकरी कर रहे हैं तो संभवतः आप एक गलत करियर में हैं।योग्यता के विपरीतहम सब में कुछ खास हुनर होता है और उसके हिसाब से हमारी रुचि भी विकसित हो जाती है। जब करियर इससे मेल खाता हो तो उस पर गर्व महसूस होता है और उससे सच्ची खुशी मिलती है। दूसरों की देखादेखी में नौकरी से जुड़े अहम निर्णय ना लें। इसलिए अपने वर्तमान काम की अपनी योग्यता और पसंद से तुलना कर देखें। यदि ये मेल नहीं खाते तो आप गलत करियर में हैं।

  • एचआर मैनेजमेंट: बदला रोल, बदला तेवर

    08.05.2015 | मैन्युफैक्चरिंग, शिपिंग और लेबर इंडस्ट्री में इंडस्ट्रियल रिलेशन और लेबर लॉ में स्पेशलाइजेशन करने वाले एचआर प्रोफेशनल्स की काफी डिमांड है। इसी तरह कुछ कंपनीज में लर्निंग एवं डेवलपमेंट प्रोफाइल्स को अधिक हायर किया जा रहा है। एजुकेशन सेक्टर में एचआर में पीएचडी करने वाले, जबकि आइटी, आइटीइएस, कंसल्टिंग सेक्टर में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले एचआर प्रोफेशनल्स की मांग है। जिन्हें सोशल सेक्टर का पैशन हो, वे एनजीओ के साथ करियर शुरू कर सकते हैं।लक्ष्मी मूर्ति, डायरेक्टर (एचआर)आइटीएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंसएम्प्लॉइज को आज एक बड़ा कॉरपोरेट एसेट माना जाने लगा है। किसी भी ऑर्गेनाइजेशन या कंपनी के डेवलपमेंट के लिए ट्रेंड, स्किल्ड और मोटिवेटेड स्टाफ की जरूरत होती है। इन्हें तलाशने का जिम्मा एचआर का होता है। इसी तरह कॉरपोरेट पॉलिसी के निर्माण में ये अहम योगदान देते हैं। इन दिनों जिस तरह से कंपनियों का अधिग्रहण हो रहा है, उसमें भी एचआर की भूमिका बढ़ रही है। यानी ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट मौजूदा दौर की मांग बन चुका है। अब यह डेस्क जॉब तक सिमट कर नहीं रहा, बल्कि लगातार नई अपॉच्र्युनिटीज लेकर आ रहा है।क्या है एचआर मैनेजमेंट?आमतौर पर एचआर कोर्स के अंतर्गत पर्सनल मैनेजमेंट, लेबर लॉ, इंडस्ट्रियल रिलेशन आदि पर फोकस किया जाता है। लेकिन बीते कुछ वर्षों से ऑर्गनाइजेशनल डेवलपमेंट, स्ट्रेटेजिक एचआर मैनेजमेंट, ऑर्गेनाइजेशनल बिहैवियर, ट्रेनिंग ऐंड डेवलपमेंट, करियर डेवलपमेंट, कोचिंग ऐंड मेंटरिंग, एम्प्लॉई एंगेजमेंट, कम्पेनसेशनल स्ट्रेटेजी आदि भी पढ़ाए जा रहे हैं।वर्क प्रोफाइलह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट का मकसद कर्मचारी की परफॉर्मेंस को इस तरह से बढ़ाना है कि संस्थान के उद्देश्यों की पूर्ति हो सके। एक एचआर का रोल एम्प्लॉई का डाटा बेस मैनेज करने से लेकर, पर्सनल फाइल्स तैयार करना, हायरिंग करना, पे-रोल प्रोसेस करना होता है। ये परफॉर्मेंस मैनेजमेंट, कम्पेनसेशन स्ट्रेटेजी आदि भी तैयार करते हैं। ऑफिस के वर्क कल्चर और एनवॉयर्नमेंट को कायम करना इनकी ही जिम्मेदारी होती है। एचआर नियमों के अनुसार, हर 50 एम्प्लॉई पर कम से कम एक एचआर पर्सनेल का होना जरूरी है।एजुकेशनल क्वालिफिकेशनकिसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएट एचआर कोर्स में एनरोल करा सकते हैं। हां, अगर साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन के बाद आप इसे ऑप्ट करते हैं, तो ऑर्गेनाइजेशन के बिहैवियर और डेवलपमेंट को समझने में आसानी होगी। दूसरी ओर इकोनॉमिक्स ग्रेजुएट्स को एचआर के बिजनेस कॉन्टेक्स्ट को समझने में मदद मिलेगी। इन दिनों इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के बीच भी एचआर कोर्स में दाखिले का ट्रेंड देखा जा रहा है।बेसिक स्किल्सफॉर्मल एजुकेशन के अलावा एक एचआर प्रोफेशनल के पास स्ट्रॉन्ग इंटरपर्सनल स्किल्स होनी चाहिए। उन्हें एक प्रोसेस को डिजाइन और डेवलप करना आना चाहिए। इसके साथ ही इंग्लिश और कम्युनिकेशन स्किल पर कमांड जरूरी है।इंडस्ट्री डिमांडअमूमन हर इंडस्ट्री में एचआर प्रोफेशनल की डिमांड है। एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में भी बेहतर अवसर हैं। आप नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट क्लियर करने के बाद किसी शिक्षण संस्थान से असिस्टेंट प्रोफेसर या रिसर्च एसोसिएट के तौर पर जुड़ सकते हैं। इस तरह अपनी नॉलेज, एक्सपर्टीज और एक्सपीरियंस के आधार पर आप कोच या मेंटर या काउंसलर के रूप में भी काम कर सकते हैं। एक एचआर मैनेजर की औसत सैलरी पांच से छह लाख रुपये सालाना होती है।

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