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Deepak Dogra
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  • गंगा के किनारे बसी बाबा विश्वनाथ की काशी

    20.04.2015 | लोक, कला और पर्यटन के मामले में वाराणसी बेहद समृद्ध है। यहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। यहां गंगा के घाट सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए हैं। भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल होने के कारण भी यहां साल भर पर्यटक खिंचे चले आते हैं। यह शिव की काशी नगरी है। साक्षात् विराजमान हैं महादेव यहां। वाराणसी की यात्रा एक तरह से शिव से मुलाकात है। मन का मैल धोना हो, मन का बोझ उतारना हो था फिर चाहिए मुक्ति तो एक बार काशी चले आइए और गंगा तट पर स्नान कर महादेव से साक्षात्कार कीजिए।ये काशी ही है जो पूरी दुनिया को बुलाती है- आओ मुझसे मिलो। यहां के घाट, मैरी चर्च, भारत कला म्यूजियम, राम नगर दुर्ग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय व नंदेश्वर कोढी दर्शनीय हैं। इन सबके अलावा यहां का काशी विश्वनाथ मंदिर विश्वविख्यात है। इसके अलावा तुलसी मनस मंदिर, भारत माता मंदिर और दुर्गा मंदिर बेहतरीन मंदिरों में से एक है।वाराणसी के आसपास भी पर्यटक स्थल हैं, जहां आप भ्रमण कर सकते हैं जैसे चुनार, सारनाथ और जौनपुर। चंद्रप्रभा वाइल्ड लाइफ सैंक्च्युरी और कैमूर वाइल्ड लाइफ सैंक्च्युरी एडवेंचर प्रेमियों के लिए बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट हैं। वाराणसी में साल भर मेले और त्योहार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। इनमें से कुछ त्योहार प्रमुख माने जाते हैं जैसे कार्तिक पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, गंगा महोत्सव, रामलीला, हनुमान जयंती, पंच कोशी परिक्रमा और महाशिवरात्रि।वाराणसी के मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण माने जाते हैं। यहां के मंदिर देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। बनारस के ज्यादातर मंदिर पुराने शहर के रास्ते में हैं। सबसे मुख्य मंदिरों में काशी विश्वनाथ मंदिर हैं, जहां भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं। पूरे साल यहां भगवान शिव के भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में शाम की आरती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसे देखने श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।बनारस शहर की पवित्रता यहां की बहती नदी गंगा के साथ भी जुड़ी है। बनारस स्थित गंगा घाट पर पर्यटकों और वहां के स्थानीय लोगों की भीड़ लगी रहती हैं। दश्वमेघ घाट, अस्सी घाट, बहना संगम, पंचगंगा और मणि कर्णिका, यहां के मुख्य घाटों में से हैं। इन घाटों के पीछे कई किवदंतियां हैं। सुबह इन घाटों पर लोगों की भीड़ रहती है, जो गंगा नदी में डुबकी लगाकर उगते सूरज की आराधना करते हैं।वाराणसी से नजदीक हैं सारनाथ, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था प्रबोधन पाने के बाद। सम्रांट अशोक ने बाद में यहां स्तूप भी बनवाया था। सारनाथ में कई सारे बौध स्मारक बने। बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार यहां उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।वाराणसी आप कभी भी जा सकते हैं। दिल्ली से सीधी ट्रेन वाराणसी जाती है। कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस, शिव गंगा एक्सप्रेस और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से पर्यटक काशी पहुंच सकते हैं। यहां कभी भी घूमने जाया जा सकता है। मगर फरवरी से लेकर अप्रैल तक का समय अच्छा रहता है।

  • गंगा के किनारे बसी बाबा विश्वनाथ की काशी

    20.04.2015 | लोक, कला और पर्यटन के मामले में वाराणसी बेहद समृद्ध है। यहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। यहां गंगा के घाट सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए हैं। भगवान शिव का प्रसिद्ध तीर्थस्थल होने के कारण भी यहां साल भर पर्यटक खिंचे चले आते हैं। यह शिव की काशी नगरी है। साक्षात् विराजमान हैं महादेव यहां। वाराणसी की यात्रा एक तरह से शिव से मुलाकात है। मन का मैल धोना हो, मन का बोझ उतारना हो था फिर चाहिए मुक्ति तो एक बार काशी चले आइए और गंगा तट पर स्नान कर महादेव से साक्षात्कार कीजिए।ये काशी ही है जो पूरी दुनिया को बुलाती है- आओ मुझसे मिलो। यहां के घाट, मैरी चर्च, भारत कला म्यूजियम, राम नगर दुर्ग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय व नंदेश्वर कोढी दर्शनीय हैं। इन सबके अलावा यहां का काशी विश्वनाथ मंदिर विश्वविख्यात है। इसके अलावा तुलसी मनस मंदिर, भारत माता मंदिर और दुर्गा मंदिर बेहतरीन मंदिरों में से एक है।वाराणसी के आसपास भी पर्यटक स्थल हैं, जहां आप भ्रमण कर सकते हैं जैसे चुनार, सारनाथ और जौनपुर। चंद्रप्रभा वाइल्ड लाइफ सैंक्च्युरी और कैमूर वाइल्ड लाइफ सैंक्च्युरी एडवेंचर प्रेमियों के लिए बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट हैं। वाराणसी में साल भर मेले और त्योहार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। इनमें से कुछ त्योहार प्रमुख माने जाते हैं जैसे कार्तिक पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, गंगा महोत्सव, रामलीला, हनुमान जयंती, पंच कोशी परिक्रमा और महाशिवरात्रि।वाराणसी के मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण माने जाते हैं। यहां के मंदिर देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। बनारस के ज्यादातर मंदिर पुराने शहर के रास्ते में हैं। सबसे मुख्य मंदिरों में काशी विश्वनाथ मंदिर हैं, जहां भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं। पूरे साल यहां भगवान शिव के भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में शाम की आरती बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसे देखने श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।बनारस शहर की पवित्रता यहां की बहती नदी गंगा के साथ भी जुड़ी है। बनारस स्थित गंगा घाट पर पर्यटकों और वहां के स्थानीय लोगों की भीड़ लगी रहती हैं। दश्वमेघ घाट, अस्सी घाट, बहना संगम, पंचगंगा और मणि कर्णिका, यहां के मुख्य घाटों में से हैं। इन घाटों के पीछे कई किवदंतियां हैं। सुबह इन घाटों पर लोगों की भीड़ रहती है, जो गंगा नदी में डुबकी लगाकर उगते सूरज की आराधना करते हैं।वाराणसी से नजदीक हैं सारनाथ, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था प्रबोधन पाने के बाद। सम्रांट अशोक ने बाद में यहां स्तूप भी बनवाया था। सारनाथ में कई सारे बौध स्मारक बने। बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार यहां उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।वाराणसी आप कभी भी जा सकते हैं। दिल्ली से सीधी ट्रेन वाराणसी जाती है। कोलकाता राजधानी एक्सप्रेस, शिव गंगा एक्सप्रेस और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से पर्यटक काशी पहुंच सकते हैं। यहां कभी भी घूमने जाया जा सकता है। मगर फरवरी से लेकर अप्रैल तक का समय अच्छा रहता है।

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