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Deepak Dogra
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  • प्राकृतिक सौंदर्य की अनुपम छटा बिखेरता न्यूजीलैंड

    20.04.2015 | शांत और प्रकृति से प्रेम करने वाले लोगों के देश न्यूजीलैंड को नजदीक से देखने के लिए आप अपनी यात्रा का आरंभ ऑकलैंड से कर सकते हैं जो यहां का सबसे बड़ा शहर है। यहां की आबादी 9 लाख के आसपास है और यहां से ज्यादातर देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें उपलब्ध हैं। यहां आपको एक ओर यूरोप के आल्प्स और एशिया के हिमालय जैसे स्कीइंग के लिए बर्फीले स्थल मिलेंगे तो दूसरी ओर दुनिया के सर्वाधिक खूबसूरत समुद्री तटों में शुमार होने वाले समुद्री तट और मनमोहक झीलें मिलेंगी। इन सबसे बढ़कर आपको यहां एक ऐसा नेटवर्क मिलेगा जो आपको आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सके, ठहरने के लिए आपको ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े और नियमों का ढेर सारा बखेड़ा न हो, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से खतरा न हो, भ्रमण करते समय भाषा की समस्या न हो।ऑकलैंडः पानी के भीतर सैरदिल जीत लेने वाले काली बालू के समुद्री तटों का आनंद उठाने के साथ ही ऑकलैंड में आप जल ढलानों के किनारे बने रिजार्ट्स में आराम कर सकते हैं और रात में कसीनो और रंगारंग पार्टियों का आनंद उठा सकते हैं। यहां हॉट एयर बैलूनिंग, गोल्फ और घुड़सवारी का लुत्फ भी लिया जा सकता है। बच्चों के मनोरंजन के लिए यहां एडवेंचर पार्क हैं तो पार्टी का आनंद लेने के लिए स्काई रेस्तरां भी यहां की खासियत हैं। ऑकलैंड पानी के भीतर की सैर के लिए भी जाना जाता है जिसका मजा आप भी ले सकते हैं। खरीदारी के लिए भी ऑकलैंड एकअच्छी जगह है। यहां से कुछ ही दूरी पर उत्तर में कैटाया और ह्वांग्रई स्थित है जहां आप शांति के साथ प्रकृति के विविध रूपों को देख सकते हैं।नाइंटी माइल बीचअपने अनोखेपन के लिए जाना जाता है। पैहिया में समुद्री लजीज खाने के साथ समुद्र में डॉल्फिनों के साथ तैरने का अतुलनीय आनंद लिया जा सकता है और आप चाहें तो गहरे पानी के भीतर तक गोताखोरी भी कर सकते हैं। यहां का स्टोन स्टोर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। पर यहां असली मजा डॉल्फिन मछलियों के साथ तैरने और उनके साथ जलक्रीड़ा करने में ही आता है। ह्वांग्रई में क्लॉक म्यूजियम और काऊ वर्ल्ड देखना भी एक अच्छा अनुभव है।वायकोटाऑकलैंड से दक्षिण की ओर आप वायकाटो घाटी जा सकते हैं जो विश्व के उन गिने-चुने भागों में एक है जहां हरियाली का आधिपत्य पूरे साल बना रहता है। यहां काले पानी में राफ्टिंग का मजा लिया जा सकता है। यहीं से वायकाटो नदी आरंभ होती है जो न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी नदी है और जिस पर हुका जलप्रपात स्थित है। हुका जलप्रपात के पास ही ताऊपु झील है जो 616 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली है। यहां आप जलक्रीड़ा कर सकते हैं। न्यूजीलैंड का हैमिल्टन शहर अपने विभिन्न थीम पार्को के लिए जाना जाता है। पर असली मजा आता है कैंब्रिज में जहां गर्म जल के समुद्री तट हैं। यहां आप अपने लिए जहां चाहें गर्म पानी का टब खोद सकते हैं और उसमें लेट सकते हैं। इस दौरान बालू के नीचे से गर्म जल के बुलबुले निकलते रहेंगे और आपके शरीर को भाप के स्नान का मजा भी देते रहेंगे। इससे शरीर को न सिर्फ राहत मिलती है, वरन कई तरह की बीमारियों में इससे फायदा भी होता है। कैंब्रिज में गर्म जल के तालाबों में भी स्नान किया जा सकता है और यहां के पहाड़ों में ऊपर से स्काई डाइविंग का मजा भी लिया जा सकता है।रहस्यमयी धरती-रोटोरूआवायकाटो से आप रोटोरूआ जा सकते हैं जिसे रहस्यमयी धरती के रूप में जाना जाता है। यहां आपको जगह-जगह धरती के नीचे से फूट रहे गर्म जल के स्त्रोत दिखेंगे और साथ ही दिखेगा जमीन के नीचे से भाप के साथ निकलता बुलबुलेदार कीचड़ जो किसी जीवित ज्वालामुखी की याद ताजा कराएगा। आमतौर पर इसे देखने का असली मजा किसी छोटे विमान या फिर हेलिकॉप्टर से ही मिलता है जो आसानी से किराये पर उपलब्ध हैं। रोटोरूआ में लाल लकड़ियों का जंगल भी देखने लायक है जो यहां की अपनी विशेषता है। इसके अतिरिक्त उत्तरी न्यूजीलैंड में आप कारोमंडल, बे ऑफ प्लेंटी और रूआपेहू में भी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं। इसमें माऊंट रूआपेहू पर बनने वाला स्नोबोर्ड सर्वाधिक आकर्षक है। इसके बाद आप न्यूजीलैंड की राजधानी वेलिंग्टन जा सकते हैं। वेलिंग्टन में शापिंग के साथ ही केबल कार का मजा आमतौर पर पर्यटक उठाते हैं। वेलिंग्टन में मशहूर साउथवार्ड कार म्यूजियम भी है। राजधानी होने के नाते यहां पूरे साल विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है।गार्डेन सिटीउत्तरी द्वीप की यात्रा के बाद आप दक्षिणी द्वीप की यात्रा का आरंभ क्राइस्ट चर्च से कर सकते हैं जो कैंटबरी का हिस्सा है और दक्षिणी न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा शहर है। यह पूरे विश्व से जुड़ा हुआ है। यहां आप कास्मोपोलिटन शहरों की सारी आधुनिक सुविधाएं पा सकते हैं जिनमें चौबीसों घंटे खुला रहने वालाकसीनो भी शामिल है। इसके साथ ही आप समुद्री तटों पर पूरा दिन धूप सेंकने में गुजार सकते हैं या फिर इस गार्डेन सिटी के हरे-भरे बागों की सैर कर सकते हैं। इसके साथ ही यहां इंटरनेशनल अंटार्कटिक सेंटर है जहां स्केटिंग से लेकर बर्फ से जुड़े अनेक नए खेलों का लुत्फ उठाया जा सकता है।पहाड़ों, वादियों, समुद्र और प्राकृतिक दृश्यों से घिरे इस हरे-भरे शहर की खूबसूरती का नजारा हॉट एयर बैलून में बैठकर लिया जा सकता है। संस्कृति की झलक पाने के इच्छुक लोगों के लिए यहां की 40 से भी ज्यादा आर्ट गैलरियां अपने आप में एक आकर्षण हैं। क्राइस्ट चर्च केअतिरिक्त कैंटबरी में आप कैकोरा में ह्वेल के दर्शन कर सकते हैं जो यहां के समुद्री तटों पर अकसर अठखेलियां करती रहती हैं। ह्वेल दर्शन के अतिरिक्त आप उत्तरी न्यूजीलैंड की तरह यहां के आकारोआ में भी डॉल्फिन मछलियों के साथ तैरने का मजा ले सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं। यह एक ऐसा स्थान है जहां समुद्र और पर्वतों का मिलन होता है और जहां नाना प्रकार के समुद्री जीव जंतु समुद्र के स्वच्छ पानी में आसानी से देखे जा सकते हैं। कैंटबरी के तिमारू जिले में माऊंट कूक मैकेंजी की हरियाली लोगों को लुभाती है और चढ़ाई तथा पर्वतारोहण के लिए लोगों को आमंत्रण देती है। यहां के पहाड़ यूरोप के आल्प्स पर्वतमाला की याद दिलाते हैं।ट्रेन से सफरक्राइस्ट चर्च से 145 किलोमीटर की दूरी पर अर्थर दर्रे से होकर गुजरने वाली ट्रेन में यात्रा करना भी अपने आप में एक अनूठा अनुभव है। इसके रास्ते में जहां एक ओर लुभावने समुद्र तट हैं वहीं दूसरी ओर पहाड़ों की श्रृंखला है। इसके अतिरिक्त रास्ते में बर्फ से ढंकी पर्वत चोटियां भी दिखती हैं और हरे-भरे जंगल भी। जिस ट्रेन से सफर किया जाता है, वह भी अपने आप में अनोखी है। यहां के हैमर स्प्रिंग में वाइन वैली भी देखने लायक है जहां लगभग हर प्रजाति के अंगूर की खेती होती है और उनसे शराब बनाई जाती है। क्राइस्ट चर्च से डुनेडिन का सफर किया जा सकता है जहां शेष न्यूजीलैंड की तरह समुद्री तटों के अतिरिक्त यहां की खासियत पीली आंखों वाले पेंग्विन देखे जा सकते हैं। ये काफी शर्मीले होते हैं और यहां की गुफाओं में रहते हैं।साउथलैंड में आपहूकरसी लायन (ऐसा वन्य प्राणी जो समुद्र में और समुद्र के बाहर दोनों जगह रह सकता है) देख सकते हैं जो सिर्फ यहीं दिखाई देते हैं। मुख्य न्यूजीलैंड में वेस्ट कोस्ट स्थित लेक मैथेसन की अपनी अलग खासियत है। इसके साफ पानी में पहाड़ों के प्रतिबिंब मन को छू लेते हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता आपको बरबस बांधे रहती है। इसके साथ ही यहां पैनकेक चट्टानों की श्रृंखला अद्वितीय अनुभव देती हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी ने दीवारें खड़ी कर रखी हों पर इन्हें एक-दूसरे से जोड़ना भूल गया हो। कुल मिलाकर पूरे न्यूजीलैंड में आप जहां चाहें मनमोहक समुद्री तट, स्कीइंग के लिए बर्फीले पहाड़, हरे-भरे जंगल और बाग-बगीचे पा सकते हैं।

  • सिमलीपाल नेशनल पार्क भी है एक दुनिया जंगल की

    20.04.2015 | यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन है सच। सफारी टूर केवल अफ्रीकी देशों की धरोहर नहीं है। अगर सफारी का मतलब घने जंगलों के बीच स्वच्छंद विचरना और जंगली जीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखना ही है, तो उड़ीसा में इसके सभी साधन हैं। उड़ीसा के कई क्षेत्रों में स्थित वन्य जीव अभ्यारण्यों, सुरक्षित वनक्षेत्रों तथा नेचुरल बॉयोलॉजिकल पार्को में आप वन्य जीवन का बहुरंगी परिदृश्य देख सकते हैं। यहां मौजूद सभी अभ्यारण्यों में मयूरभंज जिले में स्थित सिमलीपाल, जो करीब 2750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है, गेम पार्क की मुकम्मिल तस्वीर पेश करता है। बाघों की संख्या सिमलीपाल में लगातार बढ़ रही है। इसी से जाहिर है कि यहां का पर्यावरण, जलवायु और वातावरण इन जंतुओं के लिए बिलकुल अनुकूल है। घने जंगल, छोटी-बड़ी पहाडियां और उनमें अपनी पूरी मस्ती व गरिमा के साथ घूमते जंगली जीव, कुल मिलाकर पर्यटकों को लुभाने के लिए ऐसा आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करते हैं, कि आने वालों को यह स्वर्ग जैसा लगने लगता है। कोई प्रकृतिप्रेमी व्यक्ति यहां बाघों की गर्जना, हाथियों की चिंघाड़, कई तरह के देशी-विदेशी पक्षियों के मधुर कलरव, साल एवं जंगली पेड़ों से होकर गुजरती सरसराती हवाओं तथा जंगल का आदिम संगीत सुनकर मंत्रमुग्ध हो सकता है। इसकी सीमा से होकर कुल 12 नदियां गुजरती हैं और कई झरने भी यहां हैं। वन्य जीवन के अलावा बरहीपानी (400 मीटर) और जोरांडा (150 मीटर) फॉल भी यहां बार-बार आने को विवश करते हैं।जैव विविधतासिमलीपाल नेशनल पार्क के भीतर कुछ बंग्लो भी हैं और सिमलीपाल के वैभव को ठीक तरह से महसूस करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि एक रात वहीं किसी रेस्ट हाउस में बिताई जाए। रात के समय वहां रहते हुए बाघ, भालू, हिरन, चीतल, सांभर जैसे कई जंतुओं की आवाजें सुनना आपको सचमुच रोमांच से भर देगा। रात के अंधेरे को चीरती आती बाघ की दहाड़ और झींगुरों के संगीत से ऐसा लगता है गोया पूरा जंगल जाग रहा हो। मई-जून के महीने में यहां कई रंगों के खिले ऑर्किड देखकर मनमयूर नाचने लगता है। इनमें फॉक्सटेल ऑर्किड जंगल का सबसे आकर्षक पौधा है। वन्य जीवन, झरनों व वनस्पतियों के अलावा भी सिमलीपाल में देखने के लिए बहुत कुछ है। बादलों से घिरी 1158 मीटर ऊंची मेघासनी चोटी को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी स्वप्नलोक में आ गए हों। जोशीपुर के निकट मौजूद रामतीर्थ मगरमच्छ संवर्द्धन केंद्र का सफर आपको एक अलग अनुभव देगा।जैव विविधता की दृष्टि से भी सिमलीपाल बहुत समृद्ध है। भारत में फूल वाले पौधों की सात प्रतिशत और ऑर्किड की 85 प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। पौधों की कुल 1076 प्रजातियां अब तक यहां दर्ज की जा चुकी हैं। यहां पाए जाने वाले वन्य जीवों की सूची यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यह कितना संपन्न है।स्तनधारी: बाघ, चीते, जंगली भैंसे, चित्तीदार हिरन, रीछ, सांभर, माउस डियर, बार्किग डियर, जंगली सुअर, चौसिंघा, रूडी मंगूज, पंगोलिन, गिलहरी।सरीसृप: अजगर, कोब्रा, किंग कोब्रा, वाइपर, करैत, फॉरेस्ट कैलॅट, गिरगिट, मगरमच्छ, काला कछुआ, टेंट कछुआ।पक्षी: जंगली मुर्गे, धनेश, पहाड़ी मैना, अलेक्जेंड्रीन, पैराकीट, सर्पेट ईगल।कैसे पहुंचें:-सिमलीपाल में प्रवेश के लिए दो बिंदु हैं-जोशीपुर व लुलुंग। रांची, भुवनेश्वर और कोलकाता यहां से निकटतम हवाई अड्डे हैं। भुवनेश्वर व रांची से यहां के लिए नियमित बस सेवाएं हैं। टाटानगर तक ट्रेनें भी हैं और वहां से सड़कमार्ग से पहुंच सकते हैं। पार्क 10 नवंबर से 15 जून तक ही खुला रहता है। बेहतर होगा कि बंगलों की बुकिंग पहले ही करवा लें। इसके लिए आप फील्ड डायरेक्टर, सिमलीपाल टाइगर रिजर्व, मयूरभंज, उड़ीसा को लिख सकते हैं। आप चाहें तो टेलीफोन पर भी उनसे संपर्क कर सकते हैं, नंबर है 06792-252593।प्रवेश परमिट:- प्रवेश परमिट नेशनल पार्क के वन संरक्षक कार्यालय से जारी किया जाता है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर जोशीपुर में स्थित है। इसके अलावा पिठाबाटा चेक गेट स्थित पिठाबाटा रेंज के क्षेत्राधिकारी कार्यालय से भी इसे प्राप्त कर सकते हैं।

  • हरे-भरे, सुंदर मॉरीशस का मौसम भी सदा सुहाना

    20.04.2015 | मोती के समान सुंदर तथा सफेद मारीशस के चारों तरफ 100 मील का समुद्री तट और मीलों तक फैली रूपहली रेत ही इसका मुख्य आकर्षण हैं। दक्षिणी अफ्रीका के पास स्थित मारीशस द्वीप पर पहले ज्वालामुखी पर्वत थे जिनसे लावा बहता रहता था या बंजर और पथरीली भूमि थी। 1598 में डचों ने मारीशस पर सबसे पहले कब्जा किया और वे तकरीबन 120 वर्षों तक यहां रहे जिसके प्रमाण आज भी यहां मिलते हैं।1710 में डच मारीशस छोड़ कर चले गए। इसके पांच वर्ष बाद यहां फ्रेंच आए और वह 95 वर्षों तक यहां रहे। इसके बाद फ्रांसीसियों ने इस द्वीप को अंग्रेजों के हाथों बेच दिया। अंग्रेजों ने इस द्वीप को उपजाऊ और हराभरा बनाने के लिए बहुत मेहनत की। उन्होंने भारत से बिहारी मजदूरों को परिवार सहित यहां लाकर खेती के काम में लगाया। मारीशस में गन्ने की लहलहाती खेती बिहारी मजदूरों की मेहनत का ही परिणाम है।17वीं और 18वीं सदी में आए मजदूरों की पीढि़यों ने हिंदू धर्म, भाषा, पहनावा तथा रहन−सहन भारतीय परंपरा के अनुसार ही रखा। मारीशस में वैसे अब नई पीढ़ी आधुनिक पोशाक जींस वगैरह पहनने लगी है लेकिन गांवों में आज भी बड़े−बूढ़े साड़ी और कुर्ता−धोती को ही महत्व देते हैं। स्कूलों में भोजपुरी वर्नाकुलर के रूप में अनिवार्य है। यहां की बोलचाल की भाषा क्रेओल है जो फ्रेंच, अंग्रेजी और भोजपुरी भाषा के मिश्रण से बनी है।मारीशस को 1968 में अंग्रेजी शासन से पूर्ण आजादी मिली। मारीशस की जलवायु समशीतोष्ण है। यहां मई से अक्टूबर तक सर्दियों का मौसम रहता है लेकिन तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं जाता है। नवंबर से अप्रैल तक गर्मी के मौसम में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होता है। चूंकि मारीशस चारों ओर समुद्र से घिरा है इसलिए यहां का मौसम वर्ष भर सुहावना बना रहता है। यहां गर्मी में 14 घंटे का और सर्दी में 12 घंटे का दिन होता है। यहां बरसात वर्ष भर होती रहती है।मारीशस में लिली और ताड़ के वृक्षों की शोभा देखते ही बनती है। पांपलेमस में रायल बोटेनिकल गार्डन यहां का सबसे सुंदर गार्डन है। मारीशस की राजधानी पोर्टलुई यहां का सबसे बड़ा शहर एवं बंदरगाह है। यहां की चौड़ी, साफ−सुथरी सड़कें तथा यातायात व्यवस्था सैलानियों का मन मोह लेती हैं। पोर्टलुई में बड़े−बड़े अतिआधुनिक होटल एवं रेस्तरां हैं, जहां अंग्रेजी, चीनी व भारतीय भोजन आसानी से सुलभ है।मारीशस में खाने−पीने की हर चीज बहुत महंगी हैं क्योंकि यहां घी, दूध, मक्खन, सब्जियां, अनाज, कपड़े आदि सब कुछ विदेशों से आयात किया जाता है। यहां ज्यादातर खाने की वस्तुएं दक्षिण अफ्रीका से तथा कपड़े व गहने भारत, जापान और कोरिया से आयात किए जाते हैं।समुद्री खेलों के शौकीन खिलाडि़यों के लिए मारीशस सबसे उपयुक्त जगह है क्योंकि वर्ष भर यहां का मौसम खेलों के लिए बेहतर बना रहता है। आजकल समुद्री खेलों को और अधिक लोकप्रिय व सुविधाजनक बनाने के लिए मारीशस सरकार इस ओर विशेष ध्यान भी दे रही है।मारीशस जाने वाले सैलानी यहां की महिलाओं के हाथ के बने शंख, समुद्री सीप और मोती की मालाएं और हस्तकला की अनेक वस्तुओं को बड़े चाव से खरीदते हैं। तो आप भी जब यहां जाएं तो इन्हें खरीदना नहीं भूलें।

  • कश्मीर के टूरिज्म की रीढ़ है अमरनाथ यात्रा

    05.05.2015 | जिस अमरनाथ यात्रा की अवधि को लेकर अलगाववादियों द्वारा फिर से बखेड़ा खड़ा किया जा  रहा है, उसके इस पहलू की ओर वे ध्यान देने से कतरा रहे हैं कि पिछले कई सालों से अमरनाथ यात्रा  कश्मीर के टूरिज्म की रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो अमरनाथ यात्रा के कारण  ही कश्मीर का टूरिज्म पुनर्जीवित हो पाया है।जिस अमरनाथ यात्रा की अवधि को लेकर अलगाववादियों द्वारा फिर से बखेड़ा खड़ा किया जा  रहा है, उसके इस पहलू की ओर वे ध्यान देने से कतरा रहे हैं कि पिछले कई सालों से अमरनाथ यात्रा  कश्मीर के टूरिज्म की रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो अमरनाथ यात्रा के कारण  ही कश्मीर का टूरिज्म पुनर्जीवित हो पाया है।दूसरी ओर सिर्फ पिछले 10 सालों के आंकड़ों पर एक नजर दौड़ाई जाए तो यह सच्चाई सामने आती है  कि अमरनाथ यात्रा आज भी कश्मीर के टूरिज्म की रीढ़ की हड्डी साबित हो रही है, पर पर्यावरण की  पट्टी आंखों पर बांधने वाले अलगाववादी नेता इस सच्चाई से रूबरू होने को राजी नहीं हैं। उनके इस  विरोध के पीछे का कड़वा सच यह है कि वे कश्मीरियों की रोजी-रोटी पर लात मारकर अपनी दुकानों को  चलाए रखना चाहते हैं। आंकड़ों की जुबानी अगर कश्मीर के टूरिज्म की बात करें तो पिछले साल कश्मीर में आने वाले कुल 15  लाख टूरिस्टों में पौने 4 लाख का आंकड़ा अमरनाथ यात्रियों का भी जोड़ा गया था। अमरनाथ यात्रियों की  संख्या कश्मीर आने वालों के बीच शामिल करने की प्रक्रिया करीब 10 साल पहले उस समय शुरू हो गई  थी, जब राज्य सरकार ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की खातिर इन आंकड़ों को विश्व समुदाय के  समक्ष पेश किया था। इन आंकड़ों के ही मुताबिक वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2009 तक कश्मीर आए 51 लाख टूरिस्टों में  21.38 लाख अर्थात आधे से कुछ कम अमरनाथ यात्री थे, जो श्रद्धालु होने के साथ-साथ पर्यटक बनकर  भी कश्मीर में घूमे थे। कश्मीर के टूरिज्म से जुड़े हुए लोगों का भी मानना है कि अमरनाथ यात्रा कश्मीर के टूरिज्म की  लाइफलाइन है। ऐसे में अहसान फाजिली जैसे कई कश्मीरी चाहते थे कि इस यात्रा के लिए प्रबंध ऐसे होने  चाहिए ताकि यह सारा वर्ष जारी रखी जा सके। वे अलगाववादियों की मुहिम से सहमत नहीं थे। ऐसा भी  नहीं था कि वे पर्यावरण के प्रति चिंतित नहीं थे बल्कि कहते थे कि पर्यावरण को बचाने के लिए  अमरनाथ यात्रा तथा पर्यटन को इको-फ्रेंडली रूप दिया जा सकता है न कि कश्मीरियों के पेट पर लात  मारी जानी चाहिए।

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